उत्तर प्रदेश शिक्षक एवं राज्य कर्मचारी आयकर आगणन विस्तृत मार्गदर्शिका (वित्तीय वर्ष 2026-27 / कर निर्धारण वर्ष 2027-28)
उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों, सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के अध्यापकों, लिपिक संवर्ग, लेखपालों एवं अन्य राज्य कर्मचारियों के लिए प्रत्येक वित्तीय वर्ष के समापन पर आयकर आगणन प्रपत्र (Tax Computation Sheet) तैयार करना एक अनिवार्य वैधानिक प्रक्रिया है। यह प्रपत्र न केवल संबंधित आहरण-वितरण अधिकारी (DDO) / वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय में जमा होता है, बल्कि आयकर विभाग में ऑनलाइन आयकर विवरणी (ITR-1 / Sahaj) दाखिल करने का प्राथमिक आधार भी बनता है [evidence: 1]।
वित्तीय वर्ष 2026-27 (कर निर्धारण वर्ष 2027-28) के दौरान केंद्रीय बजट के संशोधित प्रावधानों, उत्तर प्रदेश 7वें राज्य वेतन आयोग के पे-मैट्रिक्स, महंगाई भत्ता (DA) संशोधनों और एरियर के चक्र ने कर गणना को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बना दिया है[cite: 3] [evidence: 1]। नीचे दी गई मार्गदर्शिका में कार्मिकों की सुविधा हेतु प्रत्येक चरण को विस्तार से समझाया गया है[cite: 3] [evidence: 1] [evidence: 2]।
1. वेतन चक्र एवं मूल वेतन निर्धारण (Salary Cycle & Basic Pay)
उत्तर प्रदेश सरकार के कार्मिकों हेतु वार्षिक वेतन आहरण का चक्र 1 मार्च 2026 से 28 फरवरी 2027 तक कुल 12 महीनों का होता है[cite: 3]। वित्तीय वर्ष की शुरुआत में मार्च 2026 (देय अप्रैल 2026) के वेतन को आधार माना जाता है[cite: 3] [evidence: 1]।
- जुलाई इंक्रीमेंट (July Increment): अधिकांश शिक्षकों व कर्मचारियों की नियुक्ति अथवा पदोन्नति की तिथि के आधार पर वार्षिक वेतन वृद्धि (3%) 1 जुलाई को देय होती है[cite: 3]। इस स्थिति में मार्च से जून (4 माह) तक पुराना मूल वेतन तथा जुलाई से फरवरी (8 माह) तक पे-मैट्रिक्स के अगले सेल का बढ़ा हुआ मूल वेतन आहरित होता है[cite: 3]।
- जनवरी इंक्रीमेंट (January Increment): जिन कर्मियों की पदोन्नति या नियुक्ति 2 जुलाई से 1 जनवरी के बीच हुई होती है, उनका इंक्रीमेंट 1 जनवरी को लगता है[cite: 3]। उन्हें मार्च से दिसंबर (10 माह) पुराना मूल वेतन तथा जनवरी व फरवरी (2 माह) में बढ़ा हुआ मूल वेतन प्राप्त होता है[cite: 3]।
2. महंगाई भत्ता (DA) दरें, 4 माह का अंतर एवं एरियर गणित
वित्तीय वर्ष 2026-27 में महंगाई भत्ते का लेखांकन निम्नलिखित क्रम में संचालित होता है[cite: 3]:
- मार्च 2026 से जून 2026: 60% की नियमित दर से महंगाई भत्ते का भुगतान होता है[cite: 3]।
- जुलाई 2026 से अक्टूबर 2026: यद्यपि केंद्र व राज्य सरकार द्वारा 1 जुलाई से DA बढ़ाकर 63% कर दिया जाता है, किंतु शासनादेश निर्गत होने में प्रायः दीपावली तक का समय लगता है[cite: 3]। इसलिए इस 4 माह की अवधि में भी कर्मचारियों को 60% DA की दर से ही नियमित मासिक वेतन प्राप्त होता है[cite: 3]।
- नवंबर 2026 से फरवरी 2027: दीपावली के समय शासनादेश जारी होने के बाद नवंबर माह से नियमित वेतन में 63% DA जुड़कर मिलता है[cite: 3]।
- 4 माह का 3% DA एरियर: जुलाई, अगस्त, सितंबर एवं अक्टूबर (कुल 4 माह) के 3% DA अंतर की राशि नवंबर के वेतन के साथ एकमुश्त एरियर के रूप में देय होती है[cite: 3]। इसका सूत्र है:
DA Arrear = (जुलाई का बेसिक पे × 3%) × 4[cite: 3]। यदि कर्मचारी एनपीएस (NPS) से आच्छादित है और उसने 10% कटौती चुनी है, तो 10% राशि PRAN में जमा होती है और 90% नकद मिलती है[cite: 3]।
3. दीपावली तदर्थ बोनस (Ad-hoc Bonus ₹6,908) एवं निवेश मोड
उत्तर प्रदेश शासन द्वारा अराजपत्रित कर्मचारियों एवं परिषदीय अध्यापकों को प्रतिवर्ष निश्चित ₹6,908 का तदर्थ बोनस स्वीकृत किया जाता है[cite: 3]। शासनादेश के अनुसार इसके भुगतान के तीन विकल्प होते हैं[cite: 3]:
- विकल्प 1 (100% नकद): संपूर्ण ₹6,908 नकद प्राप्त होते हैं और यह सकल वेतन में जुड़कर कर योग्य बनता है[cite: 3]।
- विकल्प 2 (25% नकद + 75% GPF/PPF): ₹1,727 नकद भुगतान तथा शेष ₹5,181 जीपीएफ/पीपीएफ खाते में जमा होते हैं, जो पुरानी कर व्यवस्था में धारा 80C के अंतर्गत कर छूट हेतु मान्य होते हैं[cite: 3]।
- विकल्प 3 (25% नकद + 75% NSC): ₹5,181 राष्ट्रीय बचत पत्र (NSC) में जमा होकर धारा 80C की बचत में स्वतः जुड़ जाते हैं[cite: 3]।
4. अन्य स्रोतों से आय (Income from Other Sources)
वेतनभोगी कर्मचारी केवल वेतन से ही आय अर्जित नहीं करते[cite: 3]। आयकर अधिनियम के तहत अन्य सभी आयों को प्रपत्र में घोषित करना अनिवार्य होता है[cite: 3]:
- बचत बैंक खाता ब्याज (Savings Bank Interest): बैंक खातों से प्राप्त कुल ब्याज आय को अन्य आय में जोड़ा जाता है[cite: 3]। पुरानी कर व्यवस्था में सामान्य नागरिकों को धारा 80TTA के तहत ₹10,000 तक तथा वरिष्ठ नागरिकों को धारा 80TTB के तहत सावधि जमा (FD) सहित ₹50,000 तक की कर छूट प्राप्त होती है[cite: 3]।
- सावधि जमा (FD/RD Interest): बैंक या पोस्ट ऑफिस की फिक्स डिपॉजिट से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह कर योग्य होता है[cite: 3]।
- पारिवारिक पेंशन या लाभांश (Dividend): यदि कोई पारिवारिक पेंशन या शेयर बाजार/म्यूचुअल फंड से लाभांश प्राप्त हुआ है, तो उसे भी इस मद में दर्ज किया जाता है[cite: 3]।
5. संशोधित नई कर व्यवस्था (Revised New Tax Regime - ₹12 लाख तक शून्य कर)
वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतर्गत नई कर व्यवस्था डिफ़ॉल्ट व्यवस्था है[cite: 3]। इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं[cite: 3]:
- मानक कटौती (Standard Deduction): वेतनभोगी कर्मचारियों को बिना किसी बिल या निवेश प्रमाण के सीधे ₹75,000 की मानक कटौती मिलती है[cite: 3]।
- धारा 87A के अंतर्गत पूर्ण कर रिबेट: यदि किसी कर्मचारी की कुल कर योग्य आय मानक कटौती घटाने के बाद ₹12,00,000 तक है, तो धारा 87A के तहत अधिकतम ₹60,000 तक का संपूर्ण देय आयकर शून्य हो जाता है[cite: 3]। अर्थात ₹12,75,000 तक के सकल वेतन पर प्रभावी टैक्स शून्य रहता है[cite: 3]।
- संशोधित स्लैब दरें:
- ₹0 से ₹4,00,000 तक: शून्य (0%)[cite: 3]
- ₹4,00,001 से ₹8,00,000 तक: 5%[cite: 3]
- ₹8,00,001 से ₹12,00,000 तक: 10%[cite: 3]
- ₹12,00,001 से ₹16,00,000 तक: 15%[cite: 3]
- ₹16,00,001 से ₹20,00,000 तक: 20%[cite: 3]
- ₹20,00,001 से ₹24,00,000 तक: 25%[cite: 3]
- ₹24,00,000 से अधिक: 30%[cite: 3]
6. पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) एवं अनुमन्य कटौतियाँ
जिन कर्मचारियों ने भारी गृह ऋण (Home Loan) ले रखा है, बच्चों की ट्यूशन फीस जमा करते हैं तथा पीपीएफ/एनपीएस में बड़ा निवेश करते हैं, उनके लिए पुरानी कर व्यवस्था अभी भी अधिक लाभकारी हो सकती है[cite: 3]:
- मानक कटौती: ₹50,000[cite: 3]।
- धारा 80C (अधिकतम ₹1,50,000): जीपीएफ (GPF), सामूहिक बीमा (GIS), जीवन बीमा (LIC), पीपीएफ (PPF), ट्यूशन फीस, एनएससी (NSC) तथा होम लोन का मूलधन[cite: 3]।
- धारा 80CCD(1B): राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) में ₹50,000 तक का अतिरिक्त व्यक्तिगत स्वैच्छिक निवेश[cite: 3]।
- धारा 24(b): स्व-अधिकृत आवास हेतु गृह ऋण के ब्याज पर ₹2,00,000 तक की सीधी आय कटौती[cite: 3]।
- धारा 80D: स्वयं व परिवार के स्वास्थ्य बीमा (Mediclaim) प्रीमियम पर ₹25,000 (वरिष्ठ नागरिक माता-पिता हेतु ₹50,000 तक अतिरिक्त)[cite: 3]।
- धारा 80U / 80DDB: सामान्य दिव्यांगता पर ₹75,000 तथा 80% से अधिक गंभीर दिव्यांगता पर ₹1,25,000 की सीधी छूट[cite: 3]।
- अन्य अनुमन्य कटौती: दान (Sec 80G), उच्च शिक्षा ऋण ब्याज (Sec 80E) आदि कटौतियां[cite: 3]।
7. अग्रिम आयकर कटौती (Adv. IT / TDS) का अंतिम मिलान
विभाग द्वारा मानव संपदा पे-रोल के माध्यम से प्रत्येक माह काटे गए अग्रिम आयकर (Adv. IT) का योग कुल देय कर से घटाया जाता है[cite: 3]। यदि अग्रिम जमा कर कुल देय कर से अधिक है, तो अंतिम कॉलम में ऋणात्मक राशि (Refund) प्रदर्शित होती है, जिसे ITR फाइल करते समय आयकर विभाग से वापस प्राप्त किया जा सकता है[cite: 3] [evidence: 1] [evidence: 2] [evidence: 3]।
8. प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
प्रश्न 1: क्या नई कर व्यवस्था में होम लोन ब्याज या 80C की छूट मिलती है?
उत्तर: नहीं, नई कर व्यवस्था में केवल ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है[cite: 3]। 80C, 80D, या होम लोन ब्याज की छूट केवल पुरानी कर व्यवस्था में ही अनुमन्य है[cite: 3] [evidence: 1] [evidence: 2] [evidence: 3]।
प्रश्न 2: मुझे कौन सी कर व्यवस्था चुननी चाहिए?
उत्तर: यदि आपकी कुल कटौती (80C + 80CCD + 24b ब्याज + 80D) मिलाकर ₹4,25,000 से अधिक बनती है, तभी पुरानी व्यवस्था फायदेमंद होती है; अन्यथा ₹12 लाख की सीमा तक नई कर व्यवस्था ही सबसे अधिक कर-मुक्त लाभ प्रदान करती है[cite: 3] [evidence: 1] [evidence: 2] [evidence: 3] [evidence: 5]।